पेड़ की जड़ों द्वारा निर्मित पुल – 5 Root Bridges of Meghalaya

Root Bridges of Meghalaya

क्या आप जानते हैं कि भारत में पेड़ की जड़ों द्वारा निर्मित कई पुल है?

दोस्तों,  कंक्रीट कें पुल, लोहे का पुल या लकड़ी का पुल आप सभी ने दुनियां भर में कहीं न कहीं इस तरह तरह कें पुल तो देखें ही होंगे। लेकिन, कोई आपसे कहे की पेड़ कें जड़ो द्वारा भी पुल ( Root Bridges of Meghalaya ) बनाई जा सकती हैं तो आप विश्वास करेंगे?

अहं! मुश्किल हैना विश्वास करना।

लेकिन, दोस्तों यह बात सच हैं की पेड़ो कें जड़ो द्वारा भी पुल बनाई गई हैं और यह ब्रिज भारतीय राज्य मेघालय में स्थित हैं जो आज भी एक रहस्य बना हुआ हैं। 

 दुनिया भर में सभी जगहों पर पुल आमतौर पर कंक्रीट, स्टील या अन्य निर्जीव निर्माण सामग्री का उपयोग करके बनाए जाते हैं। हम में से अधिकांश लोग लकड़ी या रस्सी के पुलों से भी परिचित हैं। हालांकि, उत्तर पूर्वी भारतीय राज्य मेघालय  ( जिसका अर्थ होता है बादलों का निवास) में, कई सारे पुल जीवित पौधों से बने हैं, जो आसपास के हरे भरे परिदृश्य के साथ पूरी तरह से मिश्रित हैं।

 यह जीवित मूल ( Root Bridges of Meghalaya ) पुल क्षेत्र के स्थानीय लोगों, खांसी और जयंतिया जनजाति  के लोगों द्वारा बनाए गए हैं, जो सिलांग पठार के पहाड़ी इलाकों में है। पुलों को विकसित होने में 15 से 30 साल का लंबा समय लगता है और एक 100 फीट से अधिक दूरी तक फैल सकता है।

 स्थानीय लोग पहले बांस के मसानिया सुपारी के पेड़ों की खोखली टहनियों को नदियों और नालों में रखते और पुल बनाते थे। यह बायोइंजीनियरिंग चमत्कार एक समय में लगभग 35 लोगों को ले जा सकता है, और 500 साल तक टिके रह सकता है, जो आधुनिक समय के परिष्कृत पुलों की तुलना में अधिक है।

 चेरापूंजी के पास नोंगरियत गांव में प्रसिद्ध उमशियांग डबल डेकर रूट ब्रिज करीब 200 साल पुराना है। इसके अलावा अधिकांश आधुनिक ब्रिज के विपरीत पेड़ों के जड़ों से बना हुआ ब्रिज स्वाभाविक रूप से समय के साथ मजबूत होते जाते हैं, और इस प्रकार नियमित रखरखाव और मरम्मत कार्य की आवश्यकता भी नहीं होती है।

 ऐतिहासिक भूमिका-Root Bridges of Meghalaya

Root Bridges of Meghalaya

 जीवित जड़ों का पुल का जन्म आदिवासियों द्वारा नवीन सोच के परिणाम स्वरुप हुआ था। मेघालय का पूरा राज्य हरे-भरे पहाड़ों और उसने कटिबंधीय जंगलों से भरा हुआ है। मानसून के मौसम के दौरान, जो आमतौर पर जून से सितंबर तक रहता है, क्षेत्र की कम बहाने वाली नदियां भयंकर हो जाती है, और तेज धाराओं के साथ उग्र पानी बहता है जिसे पैदल पार करना असंभव हो जाता है।

 लंबे समय तक, पहाड़ों के निवासियों ने इतनी तेज नदियों और नालों को पार करने के मुद्दों को दूर करने के तरीके खोजने की कोशिश की और इन धाराओं और नदियों पर बांस से पुल बनाने का काम शुरू कर दिया। हालांकि, बांस के पुल पर्याप्त मजबूत नहीं थे और आसानी से संड जाते थे और टूट जाते थे जिसकी वजह से उस जगह बसें स्थानीय बाशिंदा बरसात के मौसम में फंस जाते थे।

 फिर खासी बुजुर्गों ने जीवित जड़ो के पुल निर्माण करने की योजना बनाई। उन्होंने नदी के किनारे मजबूत रबर के पेड़ की जड़ों को नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे तक ले जाने का जुगाड़ बनाया। जब तक की नदी के दोनों तरफ से रबड़ का पेड़ का जड़ दोनों तरफ से मिलना जाए। जड़े धीरे-धीरे लंबे और मजबूत होती गई, पेड़ों के जड़ इस तरह से आपस में जुड़ती चली की गई, जिससे एक मजबूत पुलो की ढांचा बन गई।

 पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण-Root Bridges of Meghalaya

 आज, बड़ी संख्या में पर्यटक इन पर्यावरण के अनुकूल रहने वाले पुलों पर सैर का अनुभव करने के लिए मेघालय की पहाड़ियों और जंगलों की यात्रा करते हैं। इस क्षेत्र के कुछ सबसे प्रसिद्ध रूट ब्रिज में

  •  उमशियांग डबल डेकर रूट ब्रिज
  • उम्मुनोई रूट ब्रिज
  • रिट्ज मैन रूट ब्रिज
  • उमकार रूट ब्रिज, और
  • मॉवसा रूट ब्रिज
Root Bridges of Meghalaya

 शामिल है।

 इन अद्भुत पुलो के वजह से इस क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या काफी वृद्धि हुई है, जिसके वजह से  स्थानीय अर्थव्यवस्था में सकारात्मक सुधार और स्थानीय जीवन शैली में साकारात्मक परिवर्तन आया है।

 मेघालय के इन ( Root Bridges of Meghalaya ) जीवित पुलों के बारे में कई सारे अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल मैगजीन में भी प्रकाशन किया गया है और अधिक लोकप्रिय बनाया गया है। हर साल हजारों पर्यटक यह देखने आते हैं।

 जड़ो की पुल की सुरक्षा-Root Bridges of Meghalaya

मेघालय कई जीवित मूल पुल प्रकृति और मनुष्य की सरल उपलब्धियों का एक आदर्श मिश्रण है। समय के साथ मजबूत होते इन पुलों की सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं है। हालांकि, स्थानीय नियमों और विनियमों को बनाए रखना महत्वपूर्ण है, और यह सुनिश्चित करना है कि  पुलो की बहन क्षमता का उल्लंघन ना हो।

 क्या ऐसे जड़ों के पुल और बन सकते हैं-Root Bridges of Meghalaya

 आज, रस्सी, स्टील, या कंक्रीट का उपयोग करके तेजी से ब्रिज बनाए जाते हैं। जिसकी वजह से पेड़ों के जोड़ द्वारा बनाई गई है ब्रिज से लोगों के ध्यान हटा देता है।

 आज इस क्षेत्र में बने अधिकांश नए ब्रिज आधुनिक तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है। हालांकि, कुछ स्थानीय लोग अभी भी इस क्षेत्र में पुराने रूट ब्रिज को किसी भी प्रकार के हानि होने से बचाने के लिए समर्पित रूप से काम कर रहे हैं। इस क्षेत्र में नए जड़ों का ब्रिज बनाने का भी योजनाएं हैं।

 अंत में, स्पष्ट हो जाता है कि इंजीनियरिंग के चमत्कारों की इस आधुनिक दुनिया में भी, आदिवासियों द्वारा निर्मित, जीवित, सांस लेने वाले ब्रिज ( Root Bridges of Meghalaya ) हमें अपनी विशिष्टता और आश्चर्यजनक सुंदरता से मोहित करने में कभी भी असफल नहीं होंगे।

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FAQ :

Q1: भारत में पेड़ो कें जड़ो द्वारा बनाई गई पुल कहां पर हैं?

Ans: उत्तर पूर्वी भारतीय राज्य मेघालय कें नोंगरियत गाँव में 

Q2: पेड़ो कें जड़ो द्वारा बनाई गई पुल कितने साल तक टिके रह सकते हैं?

Ans : 500 साल तक

Q3: पेड़ो कें जड़ो का पुल कौन बनाया?

Ans : यह पुल खासी और जयंतीया जनाजाती कें पूर्वजो द्वारा बनाई गई हैं।

Q4: मेघालय के पेड़ के जड़ो द्वारा बनाई गई पुल तक कैसे पहुंच सकते हैं?

Ans : रीवाई पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका है शिल्लोंग से मावलीन्नौग का रास्ता जो की मावलीन्नौग की बढ़ती लोकप्रियता के कारण एक प्रसिद्ध सड़क हो गई है। रीवाई मावलीन्नौग से सिर्फ 1 किलोमीटर दूर है। यह शिलांग से लगभग 76 किलोमीटर दूर है और सड़क मार्ग से लगभग 2 घंटे 15 मिनट लगते हैं।

दोस्तों, मुझे उम्मीद हैं की आज की यह पोस्ट आपको अच्छा लगा होगा। और आपसे मेरा अनुरोध हैं की यह पोस्ट आपके दोस्तों कें साथ जरूर शेयर करें ताकि जिनको इस कें बारेमे पता न हो उसको भी कुछ जानकारी मिल जाए।

पेड़ की जड़ों द्वारा निर्मित पुल – 5 Root Bridges of Meghalaya

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