चाणक्य नीति – मुसीबत के समय में क्या करें

What to do in the time of trouble
 
कभी कभी जिंदगी में ऐसा वक्त भी आता है, लगता है कि सब कुछ गलत हो रहा है। ऐसा लगता है जैसे कि समय हमारे खिलाफ चल रहा हो। हर चीज हमारे साथ उल्टी हो रही हो। हर बात हमारे साथ गलत हो रही हो। लगता है सारे मुसीबतें हमारे पीछे पड़ गई हो। चाणक्य नीति
What do to in the time of trouble
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     ऐसा क्यों होता है? जब इंसान के जीवन में कोई दुख की घड़ी आते हैं। कोई कठिन समय आता है या बुरा वक्त आता है। तो सारे परेशानियां एक साथ आगे क्यों खड़ी हो जाती है?  ऐसे समय में इंसान को लगता है कि कोई साथ देने वाला नहीं है। इंसान खुद को अकेला महसूस करता है। खुद को हरा हुआ और कमजोर महसूस करता है। और अपना  हिम्मत ही हार के बैठ जाता है।

मनुष्य की जिंदगी बहती नदिया की तरह है-चाणक्य नीति

     एक बार गुरु जी अपने शिष्यों के साथ नदी किनारे स्नान करने के लिए गए। बहती नदिया के आगे गुरुजी एक वृक्ष के नीचे बैठ गए। और बाकी सारे शिष्य भी वही बैठ गए । काफी देर तक गुरुजी वहीं बैठे रहे। सुबह से दिन हो गया।       

    फिर आखिर में एक शिष्य ने गुरुजी से प्रश्न किया। कि गुरु जी, हम तो यह स्नान के लिए आए थे, सुबह से दिन हो चला है, आखिर हम स्नान करेंगे? तब गुरुजी ने कहा इस नदी की लहरें शांत हो जाएगी। जब यह नदी ठहर जाएगी, तब हम इसमें स्नान करेंगे।      

   तब शिष्यों ने कहा गुरु जी नदी कैसे ठहर सकती है? नदी तो ऐसे ही बहती रहेगी। हमें इसी नदी में स्नान करना पड़ेगा। फिर गुरु जी ने कहा यह नदी नहीं है यह जिंदगी है। हमारे जिंदगी में भी ऐसा ही दुख और सुख की लहरें चलती रहती है।     

  यदि दुखों से हम हार के बैठ जाएंगे। कि जब यह दुख खत्म हो जाएंगे, जब यह बुरा वक्त खत्म होगा, तब हम कुछ करेंगे। ऐसी स्थिति में हम जिंदगी में कुछ कर ही नहीं पाएंगे। क्योंकि यह जिंदगी का दस्तूर है। इन्ही  दुख की घड़ी में, इन्हीं असफलताओं के घड़ी, में हमें आगे बढ़ना है।

हिम्मत नहीं हारे-चाणक्य नीति

        इंसान को  हार नहीं माननी चाहिए। अगर विफलता की बात करें, तो  आपको मालूम होगा महान वैज्ञानिक “थॉमस अल्वा एडिसन” बल्ब बनाने के समय एक हजार बार विफल हो गए थे। जब किसी ने पूछा कि आप एक हजार बार विफल हो गए, तभी भी  आप हिम्मत नहीं हारे?     

 तभी थॉमस अल्वा एडिसन ने कहा, नहीं 1 हजार बार से भी कुछ सीखा हूं। महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन जो 4 साल की उम्र तक कुछ बोल नहीं पाते थे। और 7 साल के उम्र तक निरक्षर था। लोग उसे दिमागी रूप से कमजोर मानते थे। लेकिन वह अपनी थ्योरी और सिद्धांतों की वजह से दुनिया की सबसे बड़ी वैज्ञानिक बना।      

   हम भी जिंदगी में बहुत कुछ बड़ा कर सकते हैं। पर हम अपनी असफलताओं से हार जाते हैं। दुखों से डर जाते हैं। इसलिए हम चलना ही छोड़ देते हैं। चाहे जिंदगी में कितना भी कठिन वक्त आए, कुछ लोग कुछ सिखा कर जरूर जाता है।  मेरे अच्छे वक्त ने दुनिया को बताया कि मैं कैसा हूं। और मेरे बुरे वक्त ने मुझे बताया कि दुनिया कैसा है। 

अगर जिंदगी में बुरा वक्त ना आए, तो हम अपनों में पराए और पराए में अपने लोग कभी ढूंढ ही नहीं सकते।कितना भी कठिन समय आए  तुम घबराना मत।   सब्र करो बुरे वक्त का भी एक दिन बुरा वक्त आता है।    दुखों से कभी घबराओ मत, दुख भी एक गुरु की तरह हमारे जिंदगी में आते हैं।       

  और हमें बहुत कुछ सिखा कर चले जाता है। मैं शुक्रगुजार हूं उन तमाम लोगों का, जिन्होंने  मेरे बुरे वक्त में मेरा साथ छोड़ दिया। क्योंकि उनकी वजह से ही मुझे पता चला की मुसीबतों से मैं अकेला ही निपट सकता हूं।       

  और जिस इंसान ने बुरा वक्त देखा है, कठिन समय देखा है, जो संघर्षों से गुजरा है, वह इंसान दूसरों को दर्द को भी समझ पाता है। दूसरों को तकलीफ़ो को समझ पाता है। तो कैसा भी वक्त आए जिंदगी में कभी हिम्मत मत हारना। हर परिस्थिति में आप आगे बढ़ते रहो। क्योंकि जिंदगी आगे बढ़ने का नाम है रुकने का नहीं।         

बुरे समय में क्या करे –

चाणक्य नीति
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 दोस्तों, चाणक्य नीति के छठे अध्याय में, चाणक्य ने कहा है कि,  मनुस्य शास्त्रों को पढ़कर धर्म को जानता है। दुर्बुद्धि को छोड़ता है और ज्ञान प्राप्त करता है। तथा मोक्ष को प्राप्त करता है।

  •      पक्षियों में कौवा, पशुओं में कुत्ता, ऋषि-मुनियों में क्रोधी और मनुष्य में चुगली करने वाला चांडाल अर्थात् नीच होता है।

  •      कांसे का पात्र राख़ से, तांबे का पात्र खटाई से, स्त्री रजस्वाला होने से और नदी धारा के वेग से शुद्ध होती है।

  •     भ्रमण करने से राजा, ब्राह्मण और योगी सम्मानित होते हैं, किंतु इधर उधर घूमने से इस्त्री भ्रष्ट हो जाती है।

  •      जिनके पास धन है,  उनके अनेक मित्र होते हैं, उसी के अनेक बंधु बांधव होते हैं, वहीं पुरुष कहलाता है और वही पंडित कहा जाता है।

  •      जैसा होनहार है, वैसी ही उसकी बुद्धि हो जाती है, उद्योग धंधा हो जाती है, और सहायक भी वैसे ही मिल जाते हैं।

  •      काल ही सभी प्राणियों को खा जाता है, और काल ही प्रजा का नाश करता है, जब पूरा संसार सोया रहता है, उसी समय काल जागता है, और काल को कोई              टाल  नहीं सकता।

  •     जन्म से अंधे को कुछ दिखाई नहीं देता, काम में उन्मत्त व्यक्ति को भला-बुरा दिखाई नहीं देता, मद और व्यसन से मतवाला कुछ सोच नहीं पाता, और अर्थ         या धन का  लालची ही किसी कार्य में दोष को नहीं देखता।

  •     जीव स्वयं ही कर्म करता है, उसका फल भी स्वयं ही भोगता है। वह स्वयं ही संसार की मोह माया के भ्रम में फसता है और आप ही इससे मुक्त होता है।

  •     अपने राज्य में हुए पाप  राजा को लगता है, राजा के पाप पुरोहित को लगता है, स्त्री का पाप उसके पति और पिता को और वैसे ही अपने शिष्य का पाप गुरु को      लगता है।

  •     ऋण लेने वाला पिता शत्रु है, व्यभिचारिणी माता शत्रु है, मूर्ख संतान शत्रु है और सुंदर पत्नी स्त्री शत्रु है, अर्थात आप इन के वजह से ही मुश्किल में पड़ सकते          हैं   और  इसलिए  सतर्क रहें, इसका अर्थ यह नहीं कि आप इस से शत्रुवत व्यवहार करें।

  •     लोभी को धन से, अहंकारी  को हाथ जोड़ने से, मूर्ख को उसके अनुसार व्यवहार से, और पंडित को सच्चाई से वश में करना चाहिए।

  •     राज्य ना हो तो अच्छा है, परंतु दुष्ट  राजा का होना अच्छा नहीं है,बिना मित्र के रहना अच्छा है, किंतु दुष्ट  मित्र का होना उचित नहीं है, बिना शिष्य के रहना         ठीक है, परंतु  निंदित शिष्य अच्छा नहीं है, बिना पत्नी के रहना उचित है, किंतु दुष्ट पत्नी का होना उचित नहीं है।

  •      दुष्ट राजा के राज्य में प्रजा को सुख कहा? दुष्ट मित्रों से शांति कहा? दुष्ट स्त्रियों से घर में प्रीति कहां? दोस्त शिष्यों को पढ़ाने से कृति कहा?

  •      शेर और बगुले से एक एक, गधे से तीन, मुर्गे से चार, कौवे से पांच, और कुत्ते से 6 गुण मनुष्य को सीखने चाहिए।

  •      विद्वान को अपने संपूर्ण इंद्रियों को संयम में रखकर समय और अपने बल के मुताबिक कार्य साधना चाहिए।

  •      समय से जागना, रण में पीछे न हटना, बंधुओं में किसी चीज को बराबर बांटना, और स्वयं आक्रमण करके किसी से अपने लक्ष्य को छीन लेना, यह चारों बातें        मुर्गो से  सीखना चाहिए।

  •      मैथुन गुप्त स्थान में करना, धैर्य से काम लेना, घर में इच्छीत वस्तुओं का संग्रह करना, सावधान रहना और किसी का विश्वास नहीं करना, यह 5 गुण कौवे         से  सीखनी चाहिए।

  •      बहुत भोजन करने की शक्ति रखें, थोड़ी भोजन से ही संतुष्ट हो जाये, गहरी नींद में सोए, परंतु जरा से खटके पर ही जाग जाए, अपने रक्षक से स्वामी भक्ति         करें और  सुरता  दिखाएं, इन 6 गुणों को कुत्ते से सीखना चाहिए।

  •     अत्यंत थक जाने पर भी बोझ को ढोना, ठंडी गर्म का विचार न करना, सदा संतुष्ट होकर विचरण करना, यह तीन बातें गधे से सीखनी चाहिए।

  •      जो मनुष्य इस 20 गुणों को धारण करेगा, वह मनुष्य सदा अपने जीवन के सभी कार्यों में विजई होगा।

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